Thursday, 6 February 2014

Life's First Published Poetry : दुनियादारी

This Poetry is really close to my heart as its the 1st Poetry which was published. This was written with lot of thoughts and speculations because it was not easy for me. Often, I used to write on Romance/Love but when a close buddy asked to try something different, it clicked to my mind & I decided to give a try..
So here it might find lot of mistakes or grammatical errors..for which I apologize...after all it was first time :p 

Pic Courtesy : Clicked from Magazine

दुनियादारी :

दरियादिली-ए-क़वायद देखिये ,
या तो लुट जाते हैं ..
या तो लूट जाते हैं ..
भरोसा-ए-अहतियात कितना करे ,
जब वक़्त से पहले इंसान बदल जाते हैं ...! 

दौर-ए-हुजुम का चलन देखिये ,
कभी अपने से मिल जाते हैं ..
कभी अपने ही मिल जाते हैं ..
जज़्बात-ए-मियाद को क्या परखें ,
जब हालात से पहले खयालात बदल जाते हैं ...!
जनाज़ा-ए-दस्तूर देखिये ,
कभी साथ चले जाते हैं ..
कभी साथ चले आते हैं ..
पाबन्द-ए-ज़िन्दगी का मज़मा क्या कहें ,
जब मेरी मौत से पहले ही अपने बदल जाते हैं ...!
क़त्ल-ए-गाह ये ज़िन्दगी देखिये ,
कुछ खुद के लिए मर जाते हैं ..
कुछ खुद के लिए मारे जाते हैं ..
तमाशबीन-ए-जहां की क्या बात कहें ,
जब हर अक्स कभी किसी मुर्दों में बदल जाते है ....!
Pic Courtesy : Google

This Poetry is all about Worldliness.. how human life is & how they behave in daily time/situation affects & how human behavior changes..actions/reactions..kindliness/humanity...reality/show-off...truthfulness/fake...
Everything was tried to capture...don't know how far I was correct...
Hope you must have liked...

Be Happy & Be Blessed! :)

About Me

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Complicated माहौल में simple सा बंदा हूँ। दूरियाँ तो जायज़ है फिर भी ऐसे हमेशा करीब हूँ। कुछ लिख कर, कुछ पढ़कर, सबसे कुछ सीख कर, अकेला ही सही, एक मंज़िल के लिए निकला हूँ।