Wednesday, 11 June 2014

सागर किनारे....

भीगे समंदर के किनारे...
यह गीले अलसाए से रेत..
मेरे पाँव में छुपकर साथ चले आते है।

और चाँदनी की ठंडाई में...
नहाये कुछ अबरख...
खुद की शरारती चमक पर मुझे उकसाते है।

की आओ एक पहर गुज़ारो...
कम से कम समंदर को ही निहारो..
इसलिए हम अक्सर गीले रेत और अबरख का एक टीला बना लेते है।

About Me

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India
Complicated माहौल में simple सा बंदा हूँ। दूरियाँ तो जायज़ है फिर भी ऐसे हमेशा करीब हूँ। कुछ लिख कर, कुछ पढ़कर, सबसे कुछ सीख कर, अकेला ही सही, एक मंज़िल के लिए निकला हूँ।