Thursday, 27 October 2016

A Lyric.. रात भर।



Mujhe bhigo kar, Wo oas thi raat bhar..
Mujhe bhula kar, Wo sufi thi raat bhar..
Main wahi tha, Wo Rumi thi raat bhar..!!

मुझे भिगो कर, वो ओस थी रात भर..
मुझे भुला कर, वो सूफ़ी थी रात भर..
मैं वही था, वो रूमी थी रात भर..!!

Usey chum ke, boond sa..
Usey moond ke, neend sa..
Main lipta raha, us sey raat bhar,
Wo khwaab si rahi raat bhar..!!

उसे चूम के, बूँद सा..
उसे मूँद के, नींद सा..
मैं लिपटा रहा, उस से रात भर..
वो ख्वाब सी रही, रात भर..!!

Wo karib hai, Raqib si..
Jo door thi, Habeeb si..
Main simta raha, us me raat bhar,
Wo shama si rahi raat bhar..!!

वो करीब है, रक़ीब सी..
जो दूर थी, हबीब सी..
मैं सिमटा रहा उस में, रात भर..
वो शमा सी रही, रात भर..!!

©Abhilekh


About Me

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India
Complicated माहौल में simple सा बंदा हूँ। दूरियाँ तो जायज़ है फिर भी ऐसे हमेशा करीब हूँ। कुछ लिख कर, कुछ पढ़कर, सबसे कुछ सीख कर, अकेला ही सही, एक मंज़िल के लिए निकला हूँ।